हाथरस गैंगरेप केस में योगी सरकार से कहां हुई चूक, क्यों इतनी फजीहत…जानें 6 बड़ी बातें

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अनिल शर्मा + संजय श्रीवास्तव

हाथरस: प्रदेश के हाथरस केस ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। यूपी पुलिस से लेकर यूपी सरकार तक निशाने पर है। इस घटना में शुरू से ही पुलिस की लापरवाही सामने आ रही है। हाथरस पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस मामले में एक के बाद एक लगातार गलतियां की गईं। अगर समय रहते पुलिस और प्रशासन स्थितियां नियंत्रित कर लेता तो बात इतनी न बढ़ती।

पहली चूक: मामूली धाराओं में केस दर्ज करना
पुलिस की पहली गलती मामूली धाराओं में केस दर्ज करना रहा। गैंगरेप के बाद पीड़िता की हालत गंभीर हो गई। उसे बेहोशी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 9 दिनों तक उसे होश नहीं आया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ मामूली छेड़खानी की धाराओं में केस दर्ज किया। घरवालों का आरोप है कि पुलिस ने बेटी पर जानलेवा हमले की धाराओं तक में केस दर्ज नहीं किया।

दूसरी चूक: मौत के बाद रेप न होने की बात कहना
14 सितंबर को बेटी के साथ घटना हुई थी। इस घटना के बाद लगातार मीडिया और सोशल मीडिया में गैंगरेप की खबरें आ रही थीं। पुलिस ने एक भी बार खंडन नहीं किया कि पीड़िता के साथ रेप या गैंगरेप नहीं हुआ है। 15 दिनों बाद जब पीड़िता की इलाज के दौरान मौत हो गई तो मरने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने बयान जारी किया कि पीड़िता के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है।

तीसरी चूक: बेटी का शव आधी रात जलाना

हाथरस पुलिस और प्रशासन ने तीसरी बड़ी गलती की जब गैंगरेप पीड़िता का शव खुद आधी रात जला दिया। पीड़िता के घरवाले हाथरस में शव आने का इंतजार कर रहे थे। बेटी को हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई देने की तैयारियां चल रही थीं। आधी रात तक शव घर नहीं आया। रात लगभग साढ़े तीन बजे पुलिस प्रशासन ने लड़की का शव जला दिया। घरवालों को न तो शव दिया गया, न ही उन्हें दाह संस्कार करने दिया गया। इस कारगुजारी से पुलिस प्रशासन पर उंगलियां उठने लगीं।

चौथी चूक: राहुल-प्रियंका को गांव जाने से रोकना
घटना के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पीड़िता के घर जाने के लिए निकले। उन्हें पीड़िता के गांव जाने से रोकने के लिए बॉर्डर सील कर दिया गया। उन्हें यूपी बॉर्डर पर ही रोक दिया गया। यहां वह गाड़ी से उतरकर पैदल चले तो उन्हें पैदल भी नहीं जाने दिया गया। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस गलत नहीं है तो वह राहुल-प्रियंका को पीड़ित परिवार से मिलने क्यों नहीं दे रहे। अगर वे पीड़ित परिवार से जाकर मिल लेते तो उससे क्या हो जाता?

पांचवीं चूक: डीएम की गलत बयानबाजी
हाथरस डीएम प्रवीण कुमार के बयानों को लेकर लोगों में गुस्सा है। जिस दिन पीड़िता की मौत हुई डीएम ने पीड़ित परिवार को दिए गए मुआवजे को लेकर बयान जारी किया। उन्होंने हिसाब दिया कि पीड़ित परिवार को इतनी आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और इतनी दी जानी बाकी है। इस बयान पर लोगों ने उनकी आलोचना की। लोगों ने कहा कि पीड़िता की मौत का हिसाब डीएम रुपयों से कर रहे हैं। इसके बाद गुरुवार को डीएम पीड़िता के घर गए और उसके परिवार से बातचीत का वीडियो वायरल हुआ। आरोप है कि इस वीडियो में डीएम परिवार को धमकी देते नजर आ रहे हैं।

छठवी चूकः एडीजी के बयान कि नही हुआ रेप से भी भड़का गुस्सा
एडीजी लाॅयन आर्डर का आन्दोलन के बीच एक दम से आया यह बयान कि हाथरस की पीड़िता के साथ बलात्कार नही हुआ है। उसकी चोटें आने से मौत हुयी है। ऐसा पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे आया है। भड़के आन्दोलन के बीच एडीजी के इस बयान ने भी आग मे घी का काम किया।

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, डॉ. राकेश द्विवेदी- सम्पादक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126

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